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अरे!अजब गजब:- करवाचौथ पर प्रोफेसर की पत्नी के दीया जलाते ही कीड़ों ने डाला रंग में डाला भंग,मच्छरदानी में तोड़ा करवाचौथ का व्रत।

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​ सुल्तानपुर में करवाचौथ पर्व के अवसर पर एक अनोखा मामला सामने आया।

यहां कादीपुर के शाहगंज रोड स्थित विक्रम भवन निवासी प्रोफेसर ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह “रवि” की पत्नी सुधा सिंह ने कीड़ों के प्रकोप के चलते मच्छरदानी लगाकर अपना व्रत तोड़ा। दीया जलाते ही कीड़े बढ़ गए, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में करवाचौथ पर्व के अवसर पर एक अनोखा मामला सामने आया। यहां कादीपुर के शाहगंज रोड स्थित विक्रम भवन निवासी प्रोफेसर ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह “रवि” की पत्नी सुधा सिंह ने कीड़ों के प्रकोप के चलते मच्छरदानी लगाकर अपना व्रत तोड़ा। दीया जलाते ही कीड़े बढ़ गए, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

सुधा सिंह ने बताया कि जैसे ही उन्होंने पूजा के लिए दीया जलाया, कीड़ों का प्रकोप अचानक बढ़ गया। इससे पूजा-अर्चना करना मुश्किल हो गया, जिसके बाद उन्होंने मच्छरदानी के भीतर ही व्रत तोड़ने का फैसला किया। अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-शांति के लिए सुहागिन महिलाओं ने शुक्रवार को दिनभर निर्जला व्रत रखा। देर रात चंद्रोदय के दर्शन कर छलनी की आड़ से पति का चेहरा देखा और परंपरा पूरी की। पतियों ने अपनी पत्नियों को प्रसाद खिलाकर और पानी पिलाकर व्रत का पारण कराया।

करवा चौथ पर सुबह से ही घरों में उल्लास का माहौल था। महिलाओं ने पूजन सामग्री, करवे और साड़ियां खरीदीं, साथ ही हाथों में मेहंदी भी रचाई। यह पर्व पति-पत्नी के बीच स्नेह, समर्पण और आस्था का प्रतीक है, जिसे पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। देर रात लगभग सवा आठ बजे चांद निकलने के बाद सुहागिनों ने चंद्रमा को अर्घ्य दिया। उन्होंने अपने पतियों के लंबे जीवन और सुख-समृद्धि की कामना की।

चांद पूजन के बाद, महिलाओं ने छलनी से पति का दर्शन किया और फिर पति के हाथों से जल ग्रहण कर अपना निर्जला व्रत तोड़ा। व्रत की शुरुआत सुबह सरगी के साथ हुई, जो सास द्वारा दी जाती है। महिलाएं पूरे दिन बिना जल और आहार के रहकर पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। यह परंपरा हर साल निभाई जाती है।

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Pankaj Pandey

संपादक - आक्रामक न्यूज़

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