लालकुआँ: बिजली विभाग को बड़ा झटका, तीन बिजली बिल रद्द… उपभोक्ता को 30 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश

लालकुआँ/नैनीताल। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नैनीताल ने बिजली विभाग की लापरवाही और सेवा में कमी को गंभीर मानते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने विभाग द्वारा जारी तीन विवादित बिजली बिलों को पूरी तरह निरस्त (रद्द) कर दिया है। साथ ही मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के मद में उपभोक्ता को कुल 30 हजार रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार लालकुआँ निवासी हरी किशन पनेरू ने अधिवक्ता जयबीर सिंह एवं आदित्य कुमार के माध्यम से आयोग में परिवाद दायर किया था। परिवादी का आरोप था कि बिजली विभाग ने बिना किसी ठोस आधार के मनमाने तरीके से अत्यधिक राशि के बिजली बिल जारी कर दिए, जबकि वह नियमित रूप से अपने बिजली बिलों का भुगतान करता रहा। शिकायत और विधिक नोटिस देने के बावजूद विभाग ने कोई संतोषजनक समाधान नहीं किया, जिसके बाद उपभोक्ता को न्याय के लिए आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वर्ष 2022 तक उपभोक्ता के बिजली बिल सामान्यतः कुछ सौ रुपये प्रतिमाह आते थे, लेकिन इसके बाद विभाग ने अचानक 7 जून 2023 को 18,748 रुपये, 10 फरवरी 2024 को 30,044 रुपये और 10 सितंबर 2024 को 55,179 रुपये के भारी-भरकम बिल जारी कर दिए। आयोग ने इसे बिजली विभाग की लापरवाही, असावधानी और सेवा में स्पष्ट कमी माना।
आयोग ने अपने आदेश में इन तीनों बिजली बिलों को पूरी तरह निरस्त करते हुए बिजली विभाग को निर्देश दिया कि 14 दिसंबर 2022 से बिजली बिलों की पुनर्गणना अधिकतम 250 रुपये प्रतिमाह के आधार पर की जाए। साथ ही उपभोक्ता द्वारा पहले जमा किए गए 9,924 रुपये तथा बाद में जमा किए गए 20 हजार रुपये को समायोजित किया जाए। यदि समायोजन के बाद विभाग के पास कोई अतिरिक्त राशि बचती है तो उसे उपभोक्ता को वापस लौटाया जाए।
इसके अलावा आयोग ने बिजली विभाग को 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति तथा 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अलग से अदा करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 71 एवं 72 के तहत विभाग के खिलाफ वसूली, अर्थदंड और कारावास जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
मामले में बिजली विभाग की ओर से अधिवक्ता कैलाश चंद, मुकेश चंद्र, यशपाल आर्य और भारती आर्या ने पक्ष रखा।






