भूसे की कालाबाजारी पर सख्त एक्शन, 15 दिन तक राज्य से बाहर भेजने पर रोक

नैनीताल। जिले में पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होने वाले गेहूं के भूसे की बढ़ती कीमतों को देखते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी ने आदेश जारी कर भूसे के अनावश्यक भंडारण और राज्य से बाहर परिवहन पर आगामी 15 दिनों के लिए रोक लगा दी है।
जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड में पशुपालक मुख्य रूप से गेहूं के भूसे का उपयोग सूखे चारे के रूप में करते हैं।
हर वर्ष गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल और मई में भूसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है, लेकिन कुछ व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर भंडारण किए जाने से इसकी कृत्रिम कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि भूसे की कमी होने पर पशुपालकों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है, जिससे पशुओं को बेसहारा छोड़ने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इससे खेती को नुकसान, सड़क दुर्घटनाओं और कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की संभावना भी रहती है।
उत्तराखंड शासन के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त, सभी उपजिलाधिकारियों तथा नगर निकायों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं।
जारी निर्देशों के अनुसार:
आगामी 15 दिनों तक भूसे का ईंट भट्टों और अन्य उद्योगों में उपयोग तथा बिक्री पर रोक रहेगी।
भूसा विक्रेताओं द्वारा अनावश्यक भंडारण और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनपद में उत्पादित भूसे को राज्य से बाहर भेजने पर तत्काल 15 दिनों के लिए प्रतिबंध रहेगा।
पुआल जलाने की घटनाओं पर भी तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि पशुपालकों को पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध हो सके और कृत्रिम संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।






