कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर! पुलिस लाइन में सलामी पर बवाल, DGP ने SP से मांगा जवाब

संवैधानिक मर्यादा या आस्था का अतिक्रमण? विपक्ष बोला– संविधान पर हमला
बहराइच।
उत्तर प्रदेश के बहराइच में पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर और सलामी दिए जाने का वीडियो वायरल होते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। मामला सीधे पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा, जहां डीजीपी राजीव कृष्ण ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए एसपी बहराइच राम नयन सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया है।
परेड ग्राउंड में ‘राजकीय सम्मान’ जैसा दृश्य
जानकारी के मुताबिक बीते दिनों पुलिस लाइन बहराइच में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी के आगमन पर पुलिस बल ने परेड कर सलामी दी। पूरा दृश्य किसी संवैधानिक या राजकीय पदाधिकारी के स्वागत जैसा प्रतीत हुआ।
जैसे ही कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, पुलिस प्रोटोकॉल, प्रशासनिक मर्यादा और नियमों के उल्लंघन को लेकर सवाल उठने लगे।
DGP सख्त, बोले– परेड ग्राउंड का अनधिकृत उपयोग गंभीर
मामले का संज्ञान लेते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने स्पष्ट किया कि
> पुलिस परेड ग्राउंड का उपयोग केवल प्रशिक्षण, अनुशासनात्मक गतिविधियों और निर्धारित आधिकारिक समारोहों के लिए ही किया जा सकता है।
किसी गैर-सरकारी, गैर-संवैधानिक व्यक्ति को सलामी देना और परेड कराना नियमों के विरुद्ध है। इसी आधार पर एसपी से जवाब मांगा गया है।
विपक्ष का हमला: ‘सलामी में व्यस्त पुलिस, अपराधी मस्त’
अखिलेश यादव का तंज
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा—
> “जब पूरा पुलिस महकमा सलामी में व्यस्त रहेगा तो प्रदेश का अपराधी मस्त रहेगा। भाजपा राज में अपराध और माफिया पर लगाम लगाने की बजाय सलाम-सलाम का खेल खेला जा रहा है। क्या इस घटना का संज्ञान लेने वाला कोई है या वो भी परेड में शामिल है?”
चंद्रशेखर का तीखा बयान
भीम आर्मी चीफ और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने इसे सीधे-सीधे संविधान पर हमला बताया। उन्होंने लिखा—
> “भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। सलामी राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है, यह सम्मान संविधान और राष्ट्र के लिए है, किसी कथावाचक या बाबा के लिए नहीं।”
उन्होंने सवाल उठाए—
पुंडरीक गोस्वामी कौन सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?
किस नियम या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें Guard of Honour दिया गया?
क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान नया सरकारी प्रोटोकॉल है?
पुलिस का पक्ष: ‘मनोबल बढ़ाने के लिए बुलाया गया था’
विवाद के बीच पुलिस विभाग की ओर से सफाई दी गई है। पुलिस के अनुसार—
जनपद में प्रशिक्षण के दौरान मानसिक दबाव और अवसाद के कारण 28 पुलिसकर्मियों द्वारा सेवा से त्यागपत्र दिए गए थे।
इसी को देखते हुए प्रशिक्षणार्थियों के मनोबल, चरित्र निर्माण और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग, ध्यान और प्रेरणात्मक उद्बोधन कार्यक्रम कराए जाते हैं।
इसी क्रम में आचार्य पुंडरीक गोस्वामी को नैतिक उद्बोधन के लिए आमंत्रित किया गया था, जिसका उद्देश्य केवल कर्तव्य बोध और अवसाद निवारण था।
हालांकि सवाल अब भी कायम है कि
क्या प्रेरणात्मक उद्बोधन के नाम पर पुलिस परेड और सलामी देना जायज़ है?
क्या यह प्रशासनिक भूल थी या नियमों की खुली अवहेलना?
नज़र अब DGP की कार्रवाई पर
फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस मुख्यालय की नज़र है। एसपी के जवाब के बाद यह तय होगा कि
केवल चेतावनी दी जाएगी
या अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी
लेकिन इतना तय है कि बहराइच का यह मामला अब प्रशासनिक गलियारे से निकलकर राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।




