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हल्द्वानी में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का बड़ा प्रहार, ₹1 में मिलेगा TC, अतिरिक्त फीस लौटानी होगी; आदेश जारी

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हल्द्वानी। नैनीताल जनपद में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से मनमाने तरीके से शुल्क वसूलने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने जनपद के सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण और वसूली को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नए आदेश के तहत निजी विद्यालयों की मनमानी पर सख्त रोक लगाई गई है। अब अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर कार्रवाई होगी, स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) मात्र एक रुपये में जारी करना होगा और शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस या समायोजित करनी होगी।

जिला प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क के अलावा प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य कई मदों के नाम पर अभिभावकों से मनमाने ढंग से धनराशि वसूल रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने पूरे मामले की समीक्षा की और शिक्षा विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए।

मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी विद्यालय प्रवेश शुल्क के नाम पर मनमानी वसूली नहीं कर सकेगा।

प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक और औचित्यपूर्ण खर्च के आधार पर ही लिया जाएगा। शिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त अन्य सभी शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में लिया जा सकेगा, जिसे न्यूनतम रखना होगा। इतना ही नहीं, विकास शुल्क की स्वीकृति अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) से लेना भी अनिवार्य होगा। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

प्रशासन ने फीस बढ़ोतरी को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए हैं। आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा जारी एनओसी की शर्तों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों की अवधि में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क बढ़ा सकेंगे। इसके लिए भी PTA की अनुमति आवश्यक होगी। यदि कोई विद्यालय इससे अधिक फीस बढ़ाता है तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
परीक्षाओं और परीक्षा शुल्क को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विद्यालय पूरे शैक्षणिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करेंगे। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही कराई जा सकेंगी। परीक्षा शुल्क केवल वास्तविक खर्च के आधार पर लिया जाएगा और किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए यह शुल्क 600 रुपये से अधिक नहीं होगा।

अभिभावकों को सबसे बड़ी राहत स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) शुल्क को लेकर मिली है। अब जनपद के सभी निजी विद्यालयों को मात्र एक रुपये में टीसी जारी करनी होगी। इसके अलावा किसी भी अभिभावक को एकमुश्त फीस जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। विद्यालयों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक भुगतान की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करानी होगी तथा प्रत्येक भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होगा।

आदेश का सबसे अहम प्रावधान अतिरिक्त वसूली गई फीस को लेकर है। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त धनराशि का समायोजन आगामी 1 जुलाई 2026 से देय शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त राशि जुलाई की फीस से अधिक होगी तो शेष धनराशि आगामी महीनों की फीस में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को आदेश जारी होने के सात दिनों के भीतर इस समायोजन का प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), सीबीएसई बायलॉज तथा अन्य प्रचलित नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। दोषी विद्यालयों पर एक लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके अलावा विद्यालय की मान्यता समाप्त करने, एनओसी निरस्त करने और अन्य वैधानिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।

जिला प्रशासन के इस फैसले को निजी विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने से हजारों अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलेगी और निजी स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

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Pankaj Pandey

संपादक - आक्रामक न्यूज़

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