नगरासू गुरुद्वारा विवाद पर पंजाब CM भगवंत मान की मुख्यमंत्री धामी से बातचीत, निहंग सिखों से संवाद बनाए रखने की अपील।

कर्णप्रयाग हिंसा मामले में गिरफ्तार निहंग सिखों की रिहाई की मांग को लेकर गुरुद्वारे में डटे हैं निहंग, क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
देहरादून। रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में निहंग सिखों के डटे रहने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत कर मामले के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि निहंग सिखों की जो भी मांगें हैं, उन्हें सुनना प्राथमिकता होनी चाहिए और दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी को समझदारी से काम लेने की आवश्यकता है। साथ ही पंजाब सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिया गया है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार सिख धर्मगुरुओं के माध्यम से भी लगातार संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगरासू गुरुद्वारे में हुए घटनाक्रम पर कहा कि राज्य सरकार बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सभी धर्मों का सम्मान करती है और सिख समुदाय के पवित्र स्थलों हेमकुंड साहिब, नानकमत्ता साहिब और रीठा साहिब की गौरवशाली विरासत को संजोए हुए है। सभी धर्मों का सम्मान करना प्रदेश की संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार 20 जून की शाम से सात से आठ निहंग सिख रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में डेरा डाले हुए हैं। पहले दिन उन्होंने गुरुद्वारे के दो सेवादारों को बंधक भी बना लिया था, जिससे प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।
हालांकि 21 जून को दोनों सेवादारों को छोड़ दिया गया, लेकिन निहंग सिख हथियारों के साथ गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर डटे रहे।
प्रशासन की लगातार समझाइश के बाद 21 जून की शाम एक निहंग सिख ने आत्मसमर्पण किया। वहीं रविवार को एक अन्य निहंग सिख को भोजन लेने के लिए नीचे आने के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बावजूद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
नगरासू गुरुद्वारे के आसपास भारी पुलिस बल के साथ आईटीबीपी के जवानों को भी तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि कई बार गुरुद्वारे की छत से पुलिस और आईटीबीपी जवानों पर पथराव भी किया गया है।
कर्णप्रयाग विवाद से जुड़ा है मामला
दरअसल, 16 जून को हेमकुंड साहिब से लौट रहे कुछ निहंग श्रद्धालुओं और कर्णप्रयाग के स्थानीय व्यापारियों के बीच विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर मारपीट हुई और दो निहंग सिखों पर तलवार चलाने का आरोप लगा, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।
इस मामले में पुलिस ने दो निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बताया जा रहा है कि नगरासू गुरुद्वारे में मौजूद निहंग सिख उन्हीं दोनों साथियों की रिहाई और स्थानीय लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कर्णप्रयाग और नगरासू क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी है। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं तथा शांतिपूर्ण समाधान के प्रयास जारी हैं।






