धार्मिक भावनाएं आहत करने और आर्म्स एक्ट मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी को जमानत

हल्द्वानी। धार्मिक भावनाएं आहत करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और आर्म्स एक्ट के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी को अदालत से राहत मिल गई है। एसीजे कोर्ट सेकेंड ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। जमानती दस्तावेज और मुचलके की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
ज्योति अधिकारी बीते गुरुवार से न्यायिक हिरासत में थीं और करीब पांच दिन बाद जेल से बाहर आएंगी। इससे पहले शुक्रवार को हुई सुनवाई में पुलिस के कड़े विरोध के चलते कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, दोबारा प्रस्तुत की गई याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने शर्तों के साथ जमानत देने का फैसला सुनाया।
* *पहली सुनवाई में पुलिस ने किया था कड़ा विरोध*
पहली सुनवाई के दौरान नैनीताल पुलिस ने अदालत में सख्त रुख अपनाते हुए जमानत का विरोध किया था। पुलिस का तर्क था कि ज्योति अधिकारी सोशल मीडिया के जरिए माहौल बिगाड़ सकती हैं, धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को दोबारा आहत कर सकती हैं तथा जांच को प्रभावित करने की आशंका बनी हुई है।
पुलिस ने यह भी कहा था कि वह लगातार वीडियो बनाकर गवाहों और शिकायतकर्ताओं पर दबाव डाल सकती हैं। इन्हीं कारणों के आधार पर कोर्ट ने पहले जमानत देने से इनकार कर दिया था।
* *बुद्ध पार्क प्रदर्शन से जुड़ा है मामला*
पुलिस के अनुसार, 7 जनवरी 2026 को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान ज्योति अधिकारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह हाथ में दरांती लहराते हुए नजर आईं।
आरोप है कि इस वीडियो में उन्होंने कुमाऊं की महिलाओं और स्थानीय लोक देवताओं को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इसके बाद 8 जनवरी को शिकायतकर्ता जूही चुफाल की तहरीर पर मुखानी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस ने ज्योति अधिकारी को पूछताछ के लिए बुलाया और दिनभर की पूछताछ के बाद देर रात गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेशी के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
* *नोटिस पर वीडियो बनाना भी बना मुसीबत*
पुलिस जब ज्योति अधिकारी के घर नोटिस देने पहुंची, तब उन्होंने इसका भी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। वीडियो में वह लोगों से “मुझे बधाई तो दे दो” कहते हुए नजर आईं।
पुलिस का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से जांच प्रभावित होने का खतरा था, जिसकी जानकारी अदालत को भी दी गई। मुखानी थाने में उनके खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। इसके अलावा वादिनी और गवाह को धमकाने के आरोप में पुलिस स्वयं वादी बनकर एक और केस भी दर्ज कर चुकी है।
* *सोशल मीडिया पहचान और पुराने विवाद*
ज्योति अधिकारी सोशल मीडिया पर विवादित और तीखे वीडियो बनाने वाली इन्फ्लुएंसर के रूप में जानी जाती हैं। उन्होंने शुरुआत डांस और एंटरटेनमेंट कंटेंट से की थी, लेकिन बाद में महिला सशक्तिकरण, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर वीडियो बनाने लगीं।
फेसबुक लाइव और इंस्टाग्राम शॉर्ट्स उनके प्रमुख प्लेटफॉर्म रहे हैं। वर्ष 2022 में अंकिता भंडारी हत्याकांड के विरोध में सिर मुंडवाकर प्रदर्शन और अक्टूबर 2025 में लाइव वीडियो में दिए गए बयानों को लेकर भी वह विवादों में रही हैं।
जनवरी 2026 में बुद्ध पार्क में दरांती लहराने का मामला अब तक का उनका सबसे गंभीर विवाद माना जा रहा है।
* *जांच जारी, शर्तों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई*
फिलहाल जमानत मिलने के बावजूद ज्योति अधिकारी की कानूनी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन हुआ तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







