
गोला, कोसी और नंधौर नदियों में भू-कटाव से कई गांव खतरे में, रानीबाग पुल क्षेत्र में दिखी सबसे गंभीर क्षति
हल्द्वानी। मानसून सत्र के दौरान नैनीताल जनपद में हुई भीषण आपदा के बाद अब केंद्र सरकार की नजर इस तबाही पर है। मंगलवार को भारत सरकार की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने जिले का दौरा कर आपदा से हुई क्षति का विस्तृत मूल्यांकन किया।
टीम ने हल्द्वानी सर्किट हाउस में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि पुनर्निर्माण कार्यों के लिए ₹79,891.80 लाख (लगभग ₹798 करोड़) की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण, सिंचाई, ऊर्जा, ग्रामीण निर्माण, पेयजल और शिक्षा विभागों को हुआ है। कई विद्यालय भवन, सड़कें और पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
डीएम रयाल ने कहा कि हल्द्वानी–भीमताल–अल्मोड़ा मार्ग, जो पहाड़ी जनपदों को जोड़ने वाला अहम मार्ग है, रानीबाग मोटर पुल के पास पहाड़ कटान के कारण बार-बार बंद हो जाता है। इस समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत बताई गई।
प्रस्तुतीकरण में गोलापार, चोरगलिया, लालकुआं, हल्द्वानी, रानीबाग, रामनगर और अन्य पहाड़ी इलाकों में हुई क्षति का ब्योरा प्रस्तुत किया गया। डीएम ने बताया कि गोला, कोसी और नंधौर नदियों में गंभीर भू-कटाव से कई गांव और शहरी क्षेत्र खतरे में हैं।
बैठक के बाद केंद्रीय टीम ने गोला पुल, बलिया नाला और रानीबाग पुल क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और स्थिति का खुद आकलन किया।
केंद्रीय टीम में सी.बी.आर.आई. के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी.पी. कानूनगो, यूएलएमएमसी निदेशक शांतनु सरकार, आईआईटी रुड़की के डॉ. रूपम और इंजीनियर प्रेम नेगी शामिल थे।
इस दौरान जिले से डीएफओ कुंदन कुमार, एडीएम शैलेन्द्र सिंह नेगी, विवेक रॉय समेत कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।




