उत्तराखंड

लालकुआं में भक्ति, परंपरा और उत्सव का संगम — वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व समाजसेवी रविशंकर तिवारी के आवास पर भव्य तुलसी विवाह, एकादशी व्रत उद्यापन के साथ गूंजे मंगलीक गीत, आस्था और उल्लास से सराबोर रहा पूरा वातावरण देखें वीडियो:-

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लालकुआं।
पूर्वांचल की शान, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं समाजसेवी श्री रविशंकर तिवारी के आवास पर एकादशी व्रत उद्यापन एवं तुलसी विवाह का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और परंपरा के अनुपम संगम के रूप में सम्पन्न हुआ।
सुबह से ही तिवारी निवास पर धार्मिक वातावरण का सृजन हो गया था। श्री तिवारी एवं उनकी धर्मपत्नी ने पूर्ण श्रद्धा के साथ एकादशी व्रत का उद्यापन करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

संध्या के समय तुलसी विवाह कार्यक्रम का आयोजन शुरू हुआ, जिसमें नगर और आस-पास के क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग शामिल हुए।
पूजन-अर्चन का कार्य पंडित व्यास पाण्डेय जी के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सम्पन्न हुआ।

घर की महिलाओं ने अत्यंत भक्ति भाव से तुलसी माता को वधु स्वरूप में सजाया — सुंदर साड़ी, गहने, चुनरी और पारंपरिक श्रृंगार से तुलसी माता को दुल्हन का रूप दिया गया।
वहीं शालिग्राम जी को भगवान विष्णु स्वरूप वर के रूप में शाल और आभूषणों से सुसज्जित किया गया।

ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखनाद और मंगली गीतों के बीच पूरे वातावरण में भक्ति और आनंद का समागम दिखाई दिया।
रविशंकर तिवारी जी एवं उनकी धर्मपत्नी ने स्वयं तुलसी माता का कन्यादान किया, साथ ही शालिग्राम जी को गोदान भी किया।
वैदिक रीति-रिवाजों से सम्पन्न इस विवाह में सात फेरे कराए गए और विवाह के उपरांत प्रतीकात्मक रूप से तुलसी जी की बारात भी विदाई के साथ संपन्न हुई।

पूरे आयोजन में भक्ति, उल्लास और संस्कृति की छटा बिखरी रही।
महिलाओं ने पारंपरिक वैवाहिक गीतों पर नृत्य करते हुए माहौल को और अधिक आनंदमय बना दिया।
हर ओर केवल एक ही दृश्य था — श्रद्धा, परंपरा और आनंद का।

तिवारी परिवार ने आयोजन में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का स्नेहपूर्वक स्वागत किया।
इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, पारिवारिकजन और महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
रविशंकर तिवारी जी ने आयोजन के बाद कहा कि —

“तुलसी विवाह न केवल धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह हमारे जीवन में सदाचार, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक है। इस आयोजन का उद्देश्य समाज में भक्ति, एकता और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था को जीवित रखना है।”

आयोजन के समापन पर तिवारी जी ने तुलसी माता को कन्या स्वरूप मानते हुए दान-पुण्य और उपहार प्रदान किए।
संपूर्ण वातावरण भक्ति रस से ओत-प्रोत रहा और उपस्थित सभी लोगों ने इस अनुपम धार्मिक कार्यक्रम की सराहना की।

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Pankaj Pandey

संपादक - आक्रामक न्यूज़

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