बिहार में दूसरे चरण से पहले चुनावी प्रचार थमा, पर जुबानी जंग तेज — शाह-योगी बनाम राहुल-तेजस्वी आमने-सामने, सियासी संग्राम चरम पर, समीकरणों में मचा घमासान!

पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले चुनावी प्रचार थम चुका है, लेकिन नेताओं की जुबानी जंग और सियासी हमला-पलटवार और भी तेज हो गया है।
एक ओर गृहमंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्ष पर “जंगलराज लौटाने” का आरोप जड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव एनडीए पर “वोट चोरी” और “जनादेश लूटने” के संगीन आरोप लगा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को और गरमा दिया है।
- शाह-योगी का हमला: “वोट दो, नहीं तो लौट आएगा अपराधराज”
एनडीए नेताओं ने अपने अंतिम दौर के प्रचार में विपक्ष पर जोरदार हमला बोला।
अमित शाह ने कहा — “बिहार को विकास चाहिए, न कि फिर से लालटेन युग।”
वहीं योगी आदित्यनाथ ने भी सभा में कहा — “तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी बिहार को अंधकार में धकेल देगी, जनता को सतर्क रहना होगा।”
- राहुल-तेजस्वी का पलटवार: “जनता अब नहीं करेगी धोखा बर्दाश्त”
राहुल गांधी ने कहा — “बिहार की जनता अब वोट चोरी नहीं होने देगी, एनडीए ने सिर्फ वादे किए, काम नहीं।”
तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए कहा — “बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार से तंग जनता इस बार ठोको नीति वालों को जवाब देगी।”
- बदले समीकरण: छोटे दल बने ‘किंगमेकर’ की उम्मीद में
दूसरे चरण के मुकाबले में सिर्फ एनडीए बनाम महागठबंधन नहीं, बल्कि तीसरे मोर्चे के खिलाड़ी भी निर्णायक हो सकते हैं।
- चिराग पासवान की पार्टी कुछ सीटों पर सटीक चोट मारने की स्थिति में है।
- उपेंद्र कुशवाहा और राजभर जैसे क्षेत्रीय नेता अपने-अपने जातीय आधार पर समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
- वहीं ओवैसी की एआईएमआईएम सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम वोटों पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।
- राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये “छोटे दल” कई जगह किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।
- दूसरे चरण का रण — जनता तय करेगी किसकी रणनीति भारी!
दूसरे चरण में 94 सीटों पर मतदान होना है। इनमें भागलपुर, दरभंगा, सहरसा और गया जैसे हॉट सीट वाले इलाके शामिल हैं।
एनडीए अपने “डबल इंजन” की ताकत पर भरोसा जता रहा है, तो महागठबंधन “बदलाव की लहर” का दावा कर रहा है।
“चुनावी प्रचार थमा, लेकिन बिहार की सियासत में अब हर बयान बम है, हर मंच युद्धभूमि — फैसला जनता के हाथ में!”








