उत्तराखंड

भीमताल कांग्रेस में टिकट को लेकर ‘महाभारत’! 12 दावेदारों की खुली बगावत—“बाहरी-पराशूट उम्मीदवार नहीं चलेंगे”

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हल्द्वानी,

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भीमताल सीट पर कांग्रेस के भीतर घमासान तेज हो गया है। पार्टी के 12 दावेदारों ने एकजुट होकर नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और साफ चेतावनी दी है कि इस बार टिकट केवल स्थानीय और वर्षों से पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ता को ही दिया जाए, न कि किसी बाहरी या चुनावी समय पर पार्टी में शामिल हुए ‘पैराशूट’ उम्मीदवार को।

सोमवार को आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में डॉ. केदार पलड़िया, हरीश पनेरू और राकेश बृजवासी समेत कई नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। नेताओं का कहना था कि भीमताल की जनता और कार्यकर्ता अब थोपे गए प्रत्याशियों को स्वीकार नहीं करेंगे।

*स्थानीय बनाम बाहरी—बना बड़ा मुद्दा*

प्रेस वार्ता में नेताओं ने दो टूक कहा कि टिकट उसी को मिलना चाहिए जो लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहा हो और जनता के बीच उसकी पकड़ हो। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चुनाव के समय पार्टी में आने वाले दलबदलुओं को तरजीह देना जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होगा।
साथ ही, सभी 12 दावेदारों ने मंच से एकजुटता का संकल्प लेते हुए घोषणा की कि यदि इनमें से किसी एक को भी टिकट मिलता है, तो बाकी सभी नेता मिलकर उसे जीताने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे।

*राकेश बृजवासी का बड़ा दांव—₹1 करोड़ की पेशकश*

इस दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश बृजवासी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि पार्टी उन्हें या उनके किसी साथी को उम्मीदवार बनाती है, तो वह चुनाव जीताने के लिए एक करोड़ रुपये तक की निजी आर्थिक सहायता देने को तैयार हैं। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज कर दी है।

*भाजपा विधायक पर सीधा हमला*

कांग्रेस नेताओं ने मौजूदा भाजपा विधायक राम सिंह कैड़ा के करीब 9 साल के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में विकास की रफ्तार थम गई है और विधायक का अहंकार ही भीमताल की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

*भीमताल का सियासी समीकरण—हमेशा से उलझा*

भीमताल विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प और पेचीदा रहा है।

2017 में राम सिंह कैड़ा कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव जीत गए थे, जबकि 2022 में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की।

वहीं, कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी दान सिंह भंडारी भी अब भाजपा का दामन थाम चुके हैं, जिससे कांग्रेस की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके अलावा लाखन सिंह नेगी की सक्रियता भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

*ये हैं 12 दावेदार जो मैदान में डटे*

प्रेस वार्ता में जिन प्रमुख नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश की, उनमें डॉ. केदार पलड़िया, हरीश पनेरू, राकेश बृजवासी, खीमराज सिंह बिष्ट, राम सिंह चिलवाल, स्वपनिल जोशी, करन बोरा और भावेष नेगी शामिल रहे। इनके साथ नवीन पलड़िया, प्रताप बर्गली, पप्पू बिष्ट और राजू रुवाली भी मौजूद रहे।

भीमताल कांग्रेस में टिकट को लेकर उठी यह बगावत आने वाले दिनों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि नेतृत्व ने समय रहते संतुलन नहीं बनाया, तो यह आंतरिक कलह चुनावी नुकसान में बदल सकती है। फिलहाल एक बात साफ है—भीमताल में इस बार कांग्रेस के भीतर की लड़ाई, विपक्ष से ज्यादा बड़ी नजर आ रही है।

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Pankaj Pandey

संपादक - आक्रामक न्यूज़

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