आज से शुरू हो रहा आस्था का महापर्व — छठ पूजासूर्य उपासना का महापर्व छठ आज से — पूर्वांचल और पूर्वोत्तर भारत में भक्तिभाव का अनूठा संगम…. देखेंरिपोर्ट:-

नहाय-खाय से होगी शुभ शुरुआत, पूर्वांचल व पूर्वोत्तर भारत में छठ मइया के जयकारों से गूंजेगा वातावरण
लालकुआं/पूर्वांचल/पूर्वोत्तर।
लोकआस्था का महापर्व छठ आज से पूरे विधि-विधान के साथ प्रारंभ हो गया है। नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय पर्व की शुरुआत हो रही है। महिलाएं व्रत रखकर छठी मैया की आराधना में लीन हैं। गंगा, पोखरों और तालाबों के किनारे श्रद्धालु विशेष सफाई अभियान में जुटे हैं।
आस्था का सागर उमड़ा — आज से शुरू हुआ छठ महापर्व, नहाय-खाय से गूंजे घाट और घर
आज के दिन व्रती महिलाएं स्नान कर पवित्रता के साथ भोजन ग्रहण करती हैं और अगले दिन से निर्जला उपवास की तैयारी करती हैं। परंपरा के अनुसार, नहाय-खाय से छठ का शुभारंभ होता है, उसके बाद खरना (दूसरा दिन), संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन) और प्रातः अर्घ्य (चौथा दिन) होता है।
तीसरे दिन संध्या अर्घ्य के समय अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाएगा।
सूर्य उपासना और पर्यावरण से जुड़ा यह पर्व प्रकृति, परिवार और समाज के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
लालकुआं, हल्द्वानी, बनबसा, देहरादून,लखीमपुर, पटना ,सिलीगुड़ी, गुवाहाटी से लेकर पूर्वांचल के गांवों तक घाटों पर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने घाटों की सफाई, रोशनी और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं।
भक्तों का मानना है कि छठ मैया की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु होती है।
मुख्य चरण:
1️⃣ पहला दिन:25 अक्टूबर: नहाय-खाय (शुद्ध भोजन से व्रत की शुरुआत)
2️⃣ दूसरा दिन: 26 अक्टूबर : खरना (गुड़-चावल की खीर का प्रसाद)
3️⃣ तीसरा दिन:27 अक्टूबर: संध्या अर्घ्य (अस्त होते सूर्य को अर्घ्य) 5:37
4️⃣ चौथा दिन:28 अक्टूबर: प्रातः अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समापन) सूर्य उदय प्रातः 6:32
छठ पर्व सिर्फ पूजा नहीं, लोक और प्रकृति के संगम का उत्सव है।






