CAA के तहत 153 हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता: अफगानिस्तान-पाकिस्तान से प्रताड़ित परिवारों को मिला सम्मान, उत्तराखंड में नई शुरुआत

देहरादून।
धार्मिक उत्पीड़न झेलकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान से भारत आए 153 हिंदू शरणार्थियों को अब भारतीय नागरिकता मिलने जा रही है। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) के तहत उत्तराखंड में रह रहे इन परिवारों के आवेदनों को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है। राज्य के गृह विभाग ने गहन जांच-पड़ताल के बाद इन नामों की पुष्टि की, जिसके उपरांत नागरिकता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
147 पाकिस्तान से, 6 अफगानिस्तान से
प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान से आए 147 और अफगानिस्तान से आए 6 लोगों—कुल 153 आवेदकों—को भारतीय नागरिकता प्रदान की जा रही है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर आए कुल 189 लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 51 आवेदनों पर अभी विचार चल रहा है।
इनमें अधिकांश परिवार पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्र से संबंध रखते हैं। उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में इनके रिश्तेदार पहले से बसे होने के कारण इन्हें यहां आश्रय मिला।
CAA 2019: क्या है प्रावधान
केंद्र सरकार ने 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित किया था, जिसके तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने वाले अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया।
संसद में इस विधेयक को पारित करते समय विपक्षी दलों और वामपंथी संगठनों ने इसका विरोध किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे धार्मिक उत्पीड़न झेल रहे अल्पसंख्यक समुदायों को राहत देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
हिंगलाज शक्तिपीठ से जुड़ा परिवार भी शामिल
सूत्रों के अनुसार, अखंड भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माता हिंगलाज मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार को भी भारत में नागरिकता प्रदान की गई है। यह परिवार लंबे समय से भारत में शरण लेकर रह रहा था।
नई पहचान, नई उम्मीद
नागरिकता मिलने के बाद इन परिवारों को अब कानूनी रूप से शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और अन्य संवैधानिक अधिकारों का लाभ मिल सकेगा। वर्षों से अनिश्चितता में जीवन जी रहे इन लोगों के लिए यह निर्णय नई उम्मीद और सम्मान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
उत्तराखंड में इस फैसले को मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के समन्वय से पूरी प्रक्रिया को विधिसम्मत और पारदर्शी तरीके से पूरा किया गया है।
अब इन परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा की भावना मजबूत होगी, और वे भारतीय समाज की मुख्यधारा में पूरी तरह से शामिल हो सकेंगे।





