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15 फरवरी को महाशिवरात्रि: जब जागेगा शिवत्व… चार प्रहर की आराधना, व्रत की शक्ति और तीन दिव्य कथाओं का रहस्य

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धार्मिक डेस्क | विशेष रिपोर्ट

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की वह पावन रात फिर दस्तक दे रही है, जब पूरा देश “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठेगा।

15 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और शिव-शक्ति के मिलन की वह आध्यात्मिक रात्रि है, जिसे साल की सबसे पवित्र रात माना जाता है।
इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात को चार प्रहर में भगवान शिव की पूजा करते हैं।

इस बार पूजा का शुभ समय शाम 6:20 बजे से प्रारंभ हो रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और पूरी रात जागरण की तैयारी जोरों पर है।

*क्यों खास है महाशिवरात्रि की रात*?

मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दिन शिव के तांडव, त्याग और तप का भी प्रतीक है। कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से व्रत रखकर पूजा करते हैं, उनके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

*चार प्रहर की पूजा… क्या है महत्व*?

महाशिवरात्रि की पूरी रात को चार हिस्सों में बांटकर पूजा की जाती है—

*पहला प्रहर – संध्या से रात्रि 9 बजे तक*

*दूसरा प्रहर – 9 बजे से मध्यरात्रि*

*तीसरा प्रहर – मध्यरात्रि से 3 बजे*

*चौथा प्रहर – 3 बजे से सूर्योदय*

हर प्रहर में शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। विशेष रूप से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है।

*पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं?*

महाशिवरात्रि पर पूजा सामग्री का भी विशेष महत्व है—

बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला)
गंगाजल या शुद्ध जल
दूध, दही, घी, शहद (पंचामृत)
धतूरा, भांग और आक के फूल
चंदन, अक्षत, भस्म
फल और मिष्ठान
कहा जाता है कि शिव को बेलपत्र अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

*तीन कथाएं, जो बताती हैं महाशिवरात्रि का रहस्य*

1️⃣ *शिव-पार्वती विवाह*

माता पार्वती की कठोर तपस्या के बाद इसी दिन शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए यह दिन वैवाहिक सुख और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

2️⃣ *समुद्र मंथन और नीलकंठ*

जब समुद्र मंथन से विष निकला तो समस्त सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया। तभी से वे नीलकंठ कहलाए। यह कथा त्याग और बलिदान का संदेश देती है।

3️⃣ *अनंत ज्योति स्तंभ*

ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता विवाद के समय शिव अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। यह दर्शाता है कि शिव ही सृष्टि के आदि और अंत हैं।

आध्यात्मिक संदेश

महाशिवरात्रि हमें संयम, धैर्य और आत्मचिंतन का संदेश देती है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का पर्व है। व्रत और साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को त्यागकर सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करता है।

15 फरवरी की यह पावन रात भक्तों के लिए साधना और शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है। मंदिरों से लेकर घरों तक, हर जगह “बम बम भोले” की गूंज सुनाई देगी।

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Pankaj Pandey

संपादक - आक्रामक न्यूज़

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