हक की दहलीज पर बिन्दुखत्ता… 25 फरवरी की कैबिनेट से उम्मीदें, फिर भी लोगों का सवाल वहीं खड़ा

लालकुआं/देहरादून:
दशकों से ‘राजस्व ग्राम’ का दर्जा पाने की प्रतीक्षा कर रहा बिन्दुखत्ता अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देशों के बाद 25 फरवरी की कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। शासन स्तर पर बैठकों का दौर तेज है और प्रशासनिक औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
देहरादून में मुख्य सचिव स्तर की बैठक में प्रस्ताव के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कैबिनेट से पहले सभी विभागीय प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं, ताकि निर्णय में कोई बाधा न आए।
लालकुआं विधायक Mohan Singh Bisht ने भी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए साफ कहा है कि बिन्दुखत्ता को उसका अधिकार दिलाना उनकी प्राथमिकता है।
उम्मीदें ऊंची… लेकिन सवाल कायम
हालांकि क्षेत्र में उत्साह का माहौल है, लेकिन जमीन पर एक सवाल अब भी लोगों के मन में जस का तस खड़ा है—
क्या इस बार सचमुच अंतिम फैसला होगा या फिर यह भी एक और घोषणा बनकर रह जाएगा?
ग्रामीणों का कहना है कि—
पहले भी कई बार आश्वासन मिले, पर आदेश जमीन पर नहीं उतरे।
राजस्व ग्राम बनने के बाद सीमांकन और स्वामित्व प्रमाण पत्र कब तक मिलेंगे?
क्या सभी परिवारों को बराबरी से लाभ मिलेगा?
वन भूमि और राजस्व रिकॉर्ड की जटिलताएं कितनी जल्दी सुलझेंगी?
लोगों की मांग है कि सिर्फ कैबिनेट मंजूरी ही नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्ययोजना भी सार्वजनिक की जाए।
भावनाओं से आगे, अब चाहिए ठोस अमल
बिन्दुखत्ता के लिए यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व का सवाल है। यहां के हजारों परिवार वर्षों से बिना स्पष्ट मालिकाना हक के जीवन जी रहे हैं। ऐसे में यदि प्रस्ताव पास होता है, तो अगली सबसे बड़ी परीक्षा होगी—
कार्यान्वयन की पारदर्शिता और गति।
क्षेत्र में खुशी जरूर है, लेकिन साथ ही सतर्क नजरें भी हैं। लोग कह रहे हैं—
“इस बार कागज पर नहीं, जमीन पर बदलाव चाहिए।”
अब 25 फरवरी की कैबिनेट बैठक सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बिन्दुखत्ता के भविष्य की दिशा तय करने वाला दिन मानी जा रही है।
उम्मीदों का सूरज उगने को है… लेकिन लोगों का सवाल अभी भी वहीं खड़ा है।





