उत्तराखंड

पंतनगर यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्य विवाद: भाजपा नेता विवेक सक्सेना ने दी आत्मदाह की चेतावनी, CM धामी को लिखा पत्र

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पंतनगर

17 फरवरी तक भुगतान और कार्य शुरू न होने पर 18 फरवरी से अनशन पर बैठने का ऐलान
पंतनगर/उधमसिंह नगर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में निर्माण कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष एवं ठेकेदार विवेक सक्सेना ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं और 17 फरवरी तक भुगतान न होने पर 18 फरवरी से प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन आमरण अनशन और आत्मदाह तक भी जा सकता है।

*क्या है पूरा मामला?*

विवेक सक्सेना ने पत्र में बताया कि उनकी फर्म मैसर्स श्रीराम कंस्ट्रक्शन वर्ष 1992 से विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य करती आ रही है।

उन्होंने बताया कि संबंधित निर्माण कार्य का ऑनलाइन टेंडर डालने के बाद 12 दिसंबर 2024 को उन्हें कार्य आवंटित हुआ और 21 मार्च 2025 को अनुबंध संपन्न हुआ।
अनुबंध संख्या 63/wp(w)/dydwp/2025-26 के अंतर्गत 21 मई 2025 से कार्य प्रारंभ किया गया, जिसकी पूर्णता तिथि 20 नवंबर 2026 निर्धारित है। सक्सेना का दावा है कि उन्होंने लगभग दो माह में एक लाइन की नींव का कार्य पूरा कर लिया था।

70 लाख रुपये फंसे होने का दावा
सक्सेना के अनुसार 9 जून 2025 को उपनिदेशक जलकर खंड द्वारा कुलपति के आदेश का हवाला देते हुए कार्य रोकने का पत्र जारी किया गया। तब से निर्माण कार्य बंद पड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनका लगभग 70 लाख रुपये फंसा हुआ है, जबकि 10-15 लाख रुपये का कार्य भी पूरा हो चुका है जिसका भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने 17 जुलाई, 22 जुलाई, 26 अगस्त, 8 अक्टूबर और 11 दिसंबर 2025 को लिखित रूप से भुगतान की मांग की, लेकिन अब तक राशि जारी नहीं की गई।

*वित्त नियंत्रक पर दुर्व्यवहार का*

आरोप पत्र में सक्सेना ने विश्वविद्यालय की वित्त नियंत्रक पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भुगतान रोक दिया गया है और मुलाकात के दौरान उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने प्रशासन पर राजनीतिक द्वेष भावना से कार्य करने का आरोप भी लगाया है।

*आंदोलन की चेतावनी*

विवेक सक्सेना ने कहा है कि आर्थिक और मानसिक दबाव के कारण वे अत्यंत परेशान हैं। बैंक और बाजार का कर्ज बढ़ता जा रहा है।

यदि 17 फरवरी तक भुगतान और कार्य दोबारा शुरू नहीं किया गया तो 18 फरवरी से वे अनशन शुरू करेंगे, जो आगे चलकर आमरण अनशन में बदल सकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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Pankaj Pandey

संपादक - आक्रामक न्यूज़

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