आक्रामक न्यूज़ का असर, हरकत में आया प्रशासन, मौके पर पहुंचे अधिकारी,लालकुआं की 25 एकड़ रोड बनी ‘मौत की सड़क’ —


लालकुआं।
शहर की सबसे व्यस्त और आबादी वाली 25 एकड़ रोड इन दिनों लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि रोज़ाना मौत का खतरा बन चुकी है। जमरानी प्रोजेक्ट के तहत बन रही जमरानी नहर का अधूरा कार्य इस सड़क को पूरी तरह से तबाही के मुहाने पर ले आया है। हालात इतने भयावह हैं कि अब सड़क और नहर में फर्क करना मुश्किल हो गया है। गहरे गड्ढे, भरा हुआ पानी, संकरी सड़क और भारी ट्रैफिक — यह सब मिलकर हर दिन हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों की शिकायतों और *आक्रामक न्यूज़ की लगातार खबरों का आखिरकार असर देखने को मिला*।

सोमवार को सिंचाई विभाग व प्रोजेक्ट से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
मौके पर पहुंचे ये अधिकारी
निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग के एई दीपांशु जोशी, सुमित गंगवार, अजय कॉन्ट्रैक्ट के प्रोजेक्ट मैनेजर अजय, सीनियर एई शाहनवाज, साइट इंजीनियर सुनील भट्ट तथा लालकुआं भाजपा मंडल अध्यक्ष अरुण जोशी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों की मौजूदगी से कुछ समय के लिए स्थानीय लोगों को राहत की उम्मीद जरूर जगी।
*क्या बोले एई दीपांशु जोशी*
सिंचाई विभाग के एई दीपांशु जोशी ने मौके पर कहा कि
“रोड के किनारे बने इस बड़े और खतरनाक गड्ढे को तत्काल भरने का काम शुरू किया जाएगा और जमरानी नहर का अधूरा कार्य जल्द प्रारंभ होगा। क्षेत्र घनी बस्ती वाला है, इसी कारण कार्य में कुछ विलंब हो रहा है।”
उन्होंने आगे बताया कि सड़क किनारे लगे बिजली विभाग के ट्रांसफार्मर और बिजली के पोल कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
“बिजली विभाग को पोल और ट्रांसफार्मर हटाने के लिए लिखित रूप से कहा गया है। जैसे ही यह हटेंगे, कार्य तेज़ी से आगे बढ़ेगा।”
नालियों का पानी बना बड़ी समस्या
एई दीपांशु जोशी ने स्वीकार किया कि पुरानी नहर में 25 एकड़ कॉलोनी और बंगाली कॉलोनी की नालियों का पानी सीधे आ रहा है, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है।
“इस समस्या को लेकर सेंचुरी प्रबंधन और स्थानीय लोगों से बातचीत कर जल्द समाधान निकाला जाएगा, ताकि कार्य में कोई अवरोध न रहे।”
*उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि*
*“निर्माण कार्य के दौरान* कॉलोनीवासियों का आवागमन पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रखा जाएगा। किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। एक माह के भीतर इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य है।”
*अधूरी नहर, तबाह सड़क — हर दिन खतरे में ज़िंदगियां*
जमरानी नहर निर्माण के दौरान पहले से मौजूद छोटी नहर को तोड़कर उसे चौड़ा कर दिया गया, लेकिन इसके बाद काम अधूरा छोड़ दिया गया। नतीजा यह हुआ कि आसपास की कॉलोनियों का पानी सड़क को काटता हुआ नहर में समाने लगा। जगह-जगह गहरे गड्ढों में पानी भर गया, जिससे पूरी सड़क नहर जैसी दिखाई देने लगी है।
*रात में गुजरना मतलब मौत को दावत*
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय इस मार्ग से गुजरना किसी जुए से कम नहीं। अंधेरे में न सड़क दिखती है, न नहर — बस एक चूक और सीधा गहरे पानी भरे गड्ढे में गिरने का खतरा। दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह रास्ता सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।
*भारी ट्रैफिक और अतिक्रमण ने बढ़ाई मुसीबत*
यह रोड लालकुआं का प्रमुख और अत्यधिक व्यस्त मार्ग है। सुबह से देर रात तक भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ऊपर से सड़क के एक ओर छोटे दुकानदारों द्वारा किया गया अतिक्रमण सड़क को और संकरा कर चुका है। दूसरी ओर खुली नहर और गड्ढे — यानी ज़रा सी गलती और सीधे मौत के मुंह में।
गड्ढों में गिर कर मरे जानवरों को देखकर आज प्रशासन की आंख खुली
निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों को बिना किसी सुरक्षा उपाय के छोड़ दिया गया है
था। इनमें पानी भर जाने से आए दिन छोटे-बड़े जानवर गिर रहे थे। कई कुत्तों की मौत हो चुकी है,
आक्रामक न्यूज़ द्वारा खबर का प्रकाशन किया जाने के बाद प्रशासन की नींद खुली और आज मौके पर पहुंचकर गड्ढे को भरने व रास्ते का सुधारीकरण का कार्य किया गया।
लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए ।






