उत्तराखंड बीजेपी में बड़े बदलाव के संकेत, त्रिवेंद्र सिंह रावत और अजय भट्ट को दी गई ये जिम्मेदारी, राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के बाद संगठन में हलचल तेज


देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर बदलाव की आहट साफ सुनाई देने लगी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया उत्तराखंड दौरे के बाद संगठन और सत्ता दोनों स्तरों पर नई राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसे भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं तो कुछ इसे आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद बता रहे हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उत्तराखंड पहुंचे नितिन नवीन 28 से 30 मई तक देहरादून में रहे। इस दौरान उनके साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष भी मौजूद रहे। तीन दिनों तक चली बैठकों में संगठन की स्थिति, चुनावी रणनीति और कमजोर क्षेत्रों को मजबूत करने पर गहन मंथन किया गया। इन बैठकों के असर अब धीरे-धीरे संगठनात्मक बदलावों के रूप में दिखाई देने लगे हैं।
*कमजोर सीटों पर भाजपा का फोकस*
बैठकों में सबसे अधिक चर्चा उन विधानसभा सीटों को लेकर हुई जहां भाजपा पिछले चुनाव में कमजोर साबित हुई थी। विशेष रूप से हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले पार्टी के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। हरिद्वार जिले की 11 विधानसभा सीटों में भाजपा को 8 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि ऊधमसिंह नगर की 9 सीटों में से 5 सीटें पार्टी के हाथ से निकल गई थीं।
हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र की 14 विधानसभा सीटों में भगवानपुर, झबरेड़ा, ज्वालापुर, मंगलौर, कलियर, खानपुर, लक्सर और हरिद्वार ग्रामीण जैसी सीटों पर भाजपा को पराजय मिली थी। वहीं नैनीताल लोकसभा क्षेत्र की जसपुर, बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता और खटीमा सीटों पर भी पार्टी हार गई थी।
*त्रिवेंद्र रावत और अजय भट्ट को बड़ी जिम्मेदारी*
भाजपा नेतृत्व ने इन कमजोर सीटों को दोबारा मजबूत करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। हरिद्वार क्षेत्र की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत को दी गई है, जबकि नैनीताल लोकसभा क्षेत्र की कमजोर सीटों पर काम करने का दायित्व सांसद अजय भट्ट को सौंपा गया है।
*नाराज नेताओं को साधने की कोशिश*
राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले भाजपा में आंतरिक नाराजगी और गुटबाजी की चर्चाएं लगातार सामने आ रही थीं। विशेष रूप से भाजपा विधायक अरविंद पांडे के बयान और गतिविधियां सुर्खियों में थीं। कई मुद्दों पर उनके मुखर रुख ने पार्टी और सरकार दोनों को असहज स्थिति में डाला था।
हालांकि राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान पार्टी ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। कई वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातें हुईं, डिनर बैठकों का आयोजन किया गया और नाराज नेताओं को भी बैठकों में शामिल कर उनका फीडबैक लिया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अरविंद पांडे की एक साथ तस्वीर भी सामने आई, जिसने दोनों नेताओं के बीच चल रही कथित नाराजगी और ‘कोल्ड वॉर’ की चर्चाओं पर विराम लगाने का काम किया।
संगठन में बदलाव की शुरुआत
राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के बाद भाजपा संगठन में बदलाव का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
उत्तराखंड भाजपा के संगठन महामंत्री अजय कुमार का राजस्थान तबादला कर दिया गया है। हालांकि पार्टी इसे नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी को लेकर चर्चाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तराखंड भाजपा संगठन में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी के पदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि 2027 चुनाव से पहले संगठन को और अधिक सक्रिय और चुनावी मोड में लाने के लिए भाजपा नेतृत्व कई अहम फैसले ले सकता है।
धामी नेतृत्व पर बरकरार भरोसा
इन तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्थिति फिलहाल मजबूत दिखाई दे रही है। केंद्र नेतृत्व का भरोसा उनके ऊपर कायम है। अपने कार्यकाल के दौरान धामी सरकार की योजनाओं और फैसलों को कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह की सराहना मिल चुकी है। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष भी उत्तराखंड में धामी मॉडल से संतुष्ट नजर आए।
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