सत्ता को आईना दिखाने उतरे बिंदुखत्ता के लोग—राजस्व गांव नहीं तो आंदोलन तेज!

राजनीति से ऊपर उठकर एक मंच पर कांग्रेस-भाजपा, पूर्व सैनिक और मातृशक्ति
दर्जनों वक्ताओं ने चेताया—अब सिर्फ ऐलान चाहिए, आश्वासन नहीं
हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा है बिंदुखत्ता का सवाल
“चाय पर चर्चा” से गूंजा राजस्व गांव का मुद्दा, बिंदुखत्ता को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव
लालकुआं।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित कराने की मांग एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सड़कों पर दिखाई दी। बिंदुखत्ता वनाधिकार समिति के आह्वान पर लालकुआं तहसील प्रांगण में आयोजित एकदिवसीय धरना कार्यक्रम, जिसे प्रतीकात्मक रूप से “चाय पर चर्चा” नाम दिया गया, में सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर राज्य सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि अब बिंदुखत्ता के भविष्य को लेकर और इंतजार स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सुबह से लेकर दोपहर तक चले इस धरना-प्रदर्शन के दौरान बिंदुखत्ता क्षेत्र से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों ने एकजुट होकर तत्काल बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग उठाई। धरनास्थल पर मौजूद वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से यहां के ग्रामीण मूलभूत अधिकारों और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं, जबकि वे दशकों से यहां निवास कर रहे हैं।
मातृशक्ति की मुखर भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंची मातृशक्ति ने भी सरकार से दो टूक शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। महिलाओं ने कहा कि राजस्व गांव का दर्जा न मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी और जमीन से जुड़े अधिकारों पर सबसे ज्यादा असर परिवारों और महिलाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से सख्त और ठोस निर्णय लेने की मांग की।
राजनीति से ऊपर उठकर एक मंच
धरने की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इस मंच पर कांग्रेस, भाजपा, पूर्व सैनिक संगठन, वनाधिकार समिति और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग एक साथ नजर आए। वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता का मुद्दा किसी एक दल या संगठन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा सवाल है, जिसे राजनीति से ऊपर उठकर हल किया जाना चाहिए।
दो दर्जन से अधिक वक्ताओं ने रखा पक्ष
धरना स्थल पर दो दर्जन से अधिक वक्ताओं ने संबोधन करते हुए बिंदुखत्ता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वनाधिकार कानून, वर्षों से चल रहे आंदोलनों और सरकार द्वारा अब तक किए गए वादों की याद दिलाई। वक्ताओं ने कहा कि बार-बार ज्ञापन, धरना और वार्ता के बावजूद यदि निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आंदोलन को और व्यापक बनाने का संकेत
धरना समाप्ति के बाद आयोजकों ने संकेत दिए कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक और निर्णायक रूप दिया जाएगा। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित कराना उनका संवैधानिक अधिकार है और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।






