लालकुआं में धरना पड़ा उल्टा, महिलाओं ने खोली आयोजकों की पोल — बोलीं “रोज़ी-रोटी पर हमला, बहला-फुसलाकर लाया गया” देखें वीडियो:-

लालकुआं
सेंचुरी पल्प एंड पेपर्स मिल से निकलने वाले नाले को लेकर प्रदूषण का आरोप लगाकर मंगलवार को तहसील परिसर में शुरू किया गया धरना-प्रदर्शन उस वक्त उल्टा पड़ गया, जब नगर की दर्जनों महिलाएं अचानक जुलूस की शक्ल में तहसील पहुंच गईं और धरना आयोजकों पर ही गंभीर आरोप जड़ दिए।
महिलाओं ने “नेतागिरी बंद करो”, “नेतागिरी नहीं चलेगी” जैसे तीखे नारों के साथ तहसील परिसर का चक्कर लगाते हुए धरना कर रहे युवाओं को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रदूषण की आड़ में राजनीति कर गरीबों की रोज़ी-रोटी छीनने की साजिश रच रहे हैं।
“ *हमें बहला-फुसलाकर लाया गया*”
महिलाओं ने खुलकर कहा कि कुछ तथाकथित नेता उन्हें बहला-फुसलाकर धरना स्थल तक ले आए, जबकि असलियत में यह आंदोलन स्थानीय जनता के हित में नहीं, बल्कि निजी और राजनीतिक स्वार्थों के लिए किया जा रहा है।
महिलाओं का कहना था कि सेंचुरी मिल से उन्हें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार व आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे उनके परिवारों का जीवन चलता है। ऐसे आंदोलनों से मिल का कामकाज प्रभावित होता है और सीधा असर मजदूरों, महिलाओं और गरीब परिवारों की आजीविका पर पड़ता है।
*तहसील परिसर में तनाव, तीखी नोक-झोंक*
धरना दे रहे युवाओं और महिलाओं के बीच तीखी बहस और नोक-झोंक भी हुई, जिससे कुछ देर के लिए तहसील परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। महिलाओं ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि यह धरना तुरंत समाप्त नहीं किया गया तो वे हजारों की संख्या में खुद धरना देकर विरोध करेंगी।
*मिल प्रबंधन की सफाई — “पूरे हैं प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम*”
वहीं सेंचुरी पल्प एंड पेपर्स मिल प्रबंधन ने प्रदूषण के आरोपों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि मिल में सभी आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगे हुए हैं और पर्यावरणीय मानकों का पूरी सख्ती से पालन किया जा रहा है।
प्रबंधन का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाकर मिल और स्थानीय रोजगार को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि प्रदूषण के नाम पर किया गया धरना स्थानीय जनता के समर्थन के बजाय विरोध का कारण बन गया। महिलाओं का आक्रामक रुख यह दर्शाता है कि रोजगार से जुड़े मुद्दों पर राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।







